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दहेज़ के लालच से शादी तोड़ने वाली शाजिया ने बनाई मिसाल

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दहेज़ प्रथा का सामना करते हुए एक साहसी निर्णय

शादी का बंधन दो दिलों का मिलन होता है। जब हम किसी से विवाह करते हैं, तो इसका मुख्य उद्देश्य एक अच्छे जीवनसाथी का साथ पाना होता है। लेकिन कुछ लोग इसे पैसे कमाने का साधन समझ लेते हैं। भारत में, जहां विकास तेजी से हो रहा है, वहीं दहेज़ जैसी पुरानी कुप्रथा आज भी मौजूद है। इस प्रथा के कारण कई लड़कियों की जिंदगी प्रभावित होती है, और उनके माता-पिता को अपनी क्षमता से अधिक देना पड़ता है। दहेज़ के लालची व्यक्ति शादी के बाद भी लड़की को आर्थिक रूप से परेशान करते हैं, जिससे कई बार हिंसा, हत्या, आत्महत्या या तलाक की घटनाएं होती हैं। ऐसे में दहेज़ के लोभियों से शादी न करना ही बेहतर होता है।


उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक दूल्हा सगाई के बाद लगातार दुल्हन के परिवार से नई-नई मांगें कर रहा था। दुल्हन ने इस स्थिति का सामना करते हुए एक ऐसा कदम उठाया, जिससे सभी गर्व महसूस करेंगे।


हरदोई के एक मध्यमवर्गीय परिवार की शाजिया की शादी बरेली के महबूब सैफी से तय हुई थी। सगाई 29 सितंबर को हुई थी और शादी 31 दिसंबर को होनी थी। सगाई के समय कुछ सामान और नगद की चर्चा हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे शादी की तारीख नजदीक आई, दूल्हे की मांगें बढ़ने लगीं। अब वह अधिक नगद, चार पहिया वाहन और अन्य सामान की मांग करने लगा।


जब शाजिया को दूल्हे की इन मांगों का पता चला, तो उसने शादी के एक महीने पहले विवाह रद्द करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, उसने अपने मंगेतर और उसके परिवार के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई। शाजिया का कहना है कि 'हर दिन इस तरह की परेशानियों से बेहतर है कि दहेज़ के लालचियों से शादी ही न की जाए।'


शाजिया ने दहेज़ लेने वालों से शादी तोड़कर अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उनका मानना है कि सभी लड़कियों को दहेज़ के लालची लोगों से शादी नहीं करनी चाहिए। जो व्यक्ति शुरुआत में ही इतनी मांगें करता है, वह आगे चलकर भी दुख देगा। उनके इस फैसले से उनके माता-पिता भी बहुत खुश हैं।


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