लाइव हिंदी खबर :-वर्षों से हर हिन्दू रामायण और महाभारत द्वारा दी गई सीख को अपने जीवन पर अमला कर रहा है। इन दो महानतम ग्रंथों में मनुष्य जीवन को सरल और सफल बनाने के कयी उपदेश शामिल हैं। लेकिन महाभारत काल में ऐसे कई विद्वान हुए हैं जिन्होंने स्वयं भी अपने गुणों से मनुष्य को ज्ञान दिया है। हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री ‘विदुर’ द्वारा कई नीतियों की रचना की गई जिन्हें बाद में ‘विदुर नीति’ नामक ग्रन्थ के रूप में पाया गया। इस ग्रन्थ में ऐसे कई श्लोक हैं जो इंसानी जीवन को सही मार्ग पर ले जाने का उपदेश देते हैं।
श्लोक
अतिक्लेशेन येर्था: स्युर्ध र्मस्यातिक्रमेण वा।
अरेर्वा प्रणिपातेन मा स्म तेष मन: कृथा:।।
इस श्लोक में विदुर बता रहे हैं कि मनुष्य जीवन में ऐसी कई परिस्थितियां आती हैं जब वह अलग तरीके से धन कमाता है। उस समय उसे केवल इतना दिखता है कि उसके पास धन आ रहा है। लेकिन धन मात्र एक वास्तु नहीं, व्यक्ति का अभिमान होना चाहिए। इसलिए इसे सही तरीके से ही कमाया जाए। श्लोक के माध्यम से विदुर उन परिस्थितियों के बारे में बता रहे हैं जिनमें कमाया हुआ धन हमेशा दुःख देता है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं वे:
1. सिर झुकाकरकिसी के सामने हाथ फैलाकर, सिर झुकाकर अगर धन कामाया जाए तो ऐसा धन कभी भी सुख नहीं देता है। इस धन के इस्तेमाल से व्यक्ति दरिद्रता को ही पाता है।
किसी के साथ क्लेश या झगड़ा मोल लेने के बाद कमाया गया धन हमेशा दुःख देता है। किसी को दुःख पहुचाकर आप कभी भी खुद का सुख नहीं खोज पाएंगे। घर-परिवार में विवाद करके कमाया गया धन आपको सुख नहीं दी सकता।
3. धर्म का उल्लंघनअगर आप अपने धर्म, अपने ज़मीर का उल्लंधन करते हुए धन कमा रहे हैं, तो इससे भले ही आपके जेब भर जाए, उसे देखकर दिमागी रूप से आप खुश हो जाएं लेकिन आपका मन कभी खुश नहीं रह पाएगा।
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