S Student Loan: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश की शिक्षा व्यवस्था बदलना चाहते हैं। इससे हाई स्कूल के स्टूडेंट्स के बीच सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता को लेकर चिंता पैदा हो गई है। सबसे ज्यादा टेंशन 'फ्री एप्लीकेशन फॉर फेडरल स्टूडेंट एड' (FAFSA) और स्टूडेंट लोन को लेकर है। छात्रों को लगा रहा है कि अगर उन्हें FAFSA या लोन नहीं मिलता है, तो वह किसी तरह से महंगी पढ़ाई का खर्च उठा पाएंगे। सबसे ज्यादा टेंशन कम आय वाले छात्रों को है, जो लोन के जरिए पढ़ पाते हैं। ट्रंप सरकार शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने और नीतियों को बदलने की तैयारी में हैं। इससे छात्रों में घबराहट भी पैदा हुई है। दक्षिणी कैलिफोर्निया कॉलेज अटेनमेंट नेटवर्क के नीति निदेशक मार्कोस मोंटेस के अनुसार, छात्र सोच रहे हैं कि क्या FAFSA अभी भी उपलब्ध है। छात्रों में बहुत भ्रम है। अमेरिका में हायर एजुकेशन काफी खर्चीला होता है। स्टूडेंट लोन लेकर पढ़ने वाले छात्र कॉलेज डिग्री से खुद को आर्थिक तंगी से निकाल पाते हैं और फिर अपने लिए बेहतर भविष्य का निर्माण करने में कामयाब होते हैं। सरकारी फंडिंग को लेकर क्यों टेंशन में छात्र?सरकार शिक्षा मंत्रालय से 1300 कर्मचारियों की छंटनी करने वाली है। छात्रों को डर है कि इससे FAFSA और पेल ग्रांट जैसी महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता योजनाएं बंद हो जाएंगी। हालांकि, अभी ये योजनाएं उपलब्ध हैं, लेकिन इससे छात्रों की टेंशन कम नहीं हो रही है। वनगोल की मुख्य कार्यक्रम अधिकारी कार्ला रोबल्स-रेयेस के मुताबिक, कुछ छात्रों को डर है कि अगर वे सरकारी वित्तीय सहायता के लिए FAFSA का इस्तेमाल करते हैं, तो उनके परिवार की इमिग्रेशन स्थिति की जानकारी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट) को दी जा सकती है। इसका मतलब है कि अगर किसी छात्र के परिवार के सदस्य के पास अमेरिका में रहने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट नहीं हैं, तो उन्हें देश से निकाला जा सकता है। इस डर के चलते FAFSA आवेदकों की संख्या कम हुई है। छात्रों को लगता है कि जैसे ही वे FAFSA भरेंगे, उनके परिवार के सदस्यों पर डिपोर्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा। FAFSA में परिवार की पूरी जानकारी देनी होती है। अर्थव्यवस्था हो सकती है प्रभावितसरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता सिर्फ छात्रों के निजी मुद्दों से जुड़ी हुई नहीं है, बल्कि इसके बड़े आर्थिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। मार्को मोंटेस का कहना है कि वर्कफोर्स को ट्रेनिंग देने का सबसे अच्छी तरीका कॉलेज है। अगर सरकारी छात्र सहायता में बाधा आती है, तो इससे देश की स्किल वर्कफोर्स पर असर पड़ सकता है। इससे देश में वर्कर्स की कमी हो सकती है। अगर ज्यादा छात्र वित्तीय सहायता की चिंता की वजह से कॉलेज नहीं जाते हैं, तो देश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक नुकसान हो सकता है।
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