आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर से उठना कई लोगों के लिए एक सामान्य आदत बन गई है। काम के लंबे घंटे, मोबाइल और टीवी स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल और रातों की अनियमित दिनचर्या ने हमारी नींद की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित किया है। हम में से कई लोग मानते हैं कि ज्यादा सोने से शरीर ज्यादा तरोताजा महसूस करता है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस धारणा को पूरी तरह से गलत साबित किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, देर से उठने की आदत शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को बाधित कर सकती है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
डॉ. आदित्य गुप्ता, निदेशक - न्यूरोसर्जरी और साइबरनाइफ, आर्टेमिस अस्पताल, गुरुग्राम,के अनुसार शरीर की आंतरिक घड़ी, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है, हमारे स्वास्थ्य को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह चक्र नींद, पाचन, हॉर्मोन उत्पादन और मानसिक सतर्कता जैसी प्रक्रियाओं को संतुलित रखता है। लेकिन जब हम देर रात तक जागते हैं और सुबह देर से उठते हैं, तो यह चक्र बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर हमारी त्वचा, हृदय, मस्तिष्क और संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि अनियमित नींद से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ सकता है, जिससे त्वचा जल्दी बूढ़ी दिखने लगती है और शरीर में सूजन की समस्या बढ़ सकती है।
इसलिए, यदि आप भी उन लोगों में से हैं जो रोजाना देर से उठने की आदत में फंसे हुए हैं, तो यह समय अपने रुटीन में बदलाव लाने का है। अच्छी और नियमित नींद न केवल आपको दिनभर ऊर्जावान बनाए रखेगी बल्कि आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाएगी। आइए जानते हैं कि आखिर देर से उठने की आदत को सुधारना क्यों जरूरी है और यह आपके स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकती है। (Photo credit): iStock
1.उम्र बढ़ने की प्रक्रिया हो सकती है तेज

अगर आप देर से उठते हैं, तो आपकी त्वचा और शरीर पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। शोध बताते हैं कि सही समय पर सोना और उठना कोलेजन उत्पादन को बनाए रखने में मदद करता है, जो त्वचा की लोच (इल्यास्टिसिटी) को बनाए रखता है। यदि यह बाधित हो जाए, तो झुर्रियां और महीन रेखाएं जल्दी दिखाई देने लगती हैं।
2. हार्मोनल असंतुलन और वजन बढ़ने की समस्या
देर से उठने से शरीर के हॉर्मोन्स असंतुलित हो सकते हैं, खासकर मेलाटोनिन और कोर्टिसोल। मेलाटोनिन नींद को नियंत्रित करता है, जबकि कोर्टिसोल तनाव से जुड़ा होता है। यदि कोर्टिसोल का स्तर ज्यादा हो जाए, तो शरीर में चर्बी जमा होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे मोटापा और मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
3. मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव
नींद और मानसिक स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। देर से उठने वालों में डिप्रेशन, चिंता और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं अधिक पाई जाती हैं। नींद की अनियमितता दिमागी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है, जिससे याददाश्त कमजोर होने लगती है और मूड स्विंग्स बढ़ सकते हैं।
4. हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा
रात में देर से सोने और सुबह देर से उठने से ब्लड प्रेशर और हृदय की सेहत पर सीधा असर पड़ सकता है। अध्ययनों में यह पाया गया है कि जो लोग पर्याप्त और सही समय पर नींद नहीं लेते, उनमें हृदय रोगों, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा अधिक होता है।
5. दिनभर की ऊर्जा और प्रोडक्टिविटी पर असर

देर से उठने से आपकी ऊर्जा का स्तर कम हो सकता है, जिससे दिनभर थकान और सुस्ती महसूस होती है। नियमित और अच्छी नींद न केवल ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि यह शरीर को आवश्यक ऊर्जा भी प्रदान करती है, जिससे दिनभर काम करने की प्रोडक्टिविटी बढ़ती है।डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है
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