बेंगलुरु, 5 अप्रैल . हाल ही में 15वीं सीनियर महिला राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप जीतने के बाद महिमा टेटे के लिए पिछले कुछ हफ्ते यादगार रहे हैं. झारखंड की इस 21 वर्षीय मिडफील्डर को अब सीनियर नेशनल कैंप में जगह मिली है, जहां वह अपनी बड़ी बहन और भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे के साथ ट्रेनिंग कर रही हैं.
महिमा ने कैंप में बहन के साथ बिताए अनुभव को साझा करते हुए हॉकी इंडिया के हवाले से कहा, मैं हमेशा अपनी दीदी के नक्शेकदम पर चलना चाहती थी और देश के लिए अच्छा करना चाहती थी. अब जब मैं उनके साथ ट्रेनिंग कर रही हूं, तो बहुत अच्छा लग रहा है. जब मैं कुछ गलत करती हूं, तो वह मुझे समझाती हैं और सुधारने में मदद करती हैं. दीदी मुझे बहुत सपोर्ट करती हैं.
महिमा ने बताया कि कैंप में आने से पहले सलीमा ने उन्हें कई अहम बातें बताईं, जिससे वह मानसिक रूप से तैयार हो सकीं. उन्होंने कहा, “दीदी ने मुझे मेहनत करने और कभी पीछे न हटने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि घरेलू टूर्नामेंट की तुलना में यहां खेल की रफ्तार तेज होती है, इसलिए हर वक्त सतर्क रहना होगा. यह सुनकर मैंने अपने मन को पहले ही तैयार कर लिया था.”
महिमा शुरू में 65 संभावित खिलाड़ियों की सूची में थीं, लेकिन ट्रेनिंग और फिटनेस टेस्ट में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें 2 अप्रैल को घोषित 40 सदस्यीय मुख्य सूची में जगह मिल गई. इस पर उन्होंने कहा, यह एक अलग अनुभव है. सीनियर खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करना शानदार है. मैं खुश हूं कि सीनियर टीम में हूं, लेकिन मुझे अब और मेहनत करनी होगी ताकि उस स्तर तक पहुंच सकूं जहां मुझे होना चाहिए. उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से मुकाबले के लिए बहुत फिट और तेज होना जरूरी है. इसलिए सीनियर कैंप में हमें बहुत कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है.
बीमार होने के बावजूद फाइनल मैच में झोंकी पूरी ताकत
महिमा ने झारखंड की ओर से खेले गए सभी पांच मुकाबलों में अहम भूमिका निभाई और टीम को पहली बार फाइनल तक पहुंचाने में मदद की. फाइनल में झारखंड ने गत चैंपियन हरियाणा को शूटआउट में 4-3 से हराकर खिताब अपने नाम किया. इस खास दिन पर महिमा बीमार थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
महिमा ने कहा, मैं बीमार थी, इसलिए शूटआउट में हिस्सा नहीं ले सकी, लेकिन मैंने खुद को तैयार किया और चार बोतल पानी पिया ताकि पूरे मैच में खेल सकूं. मैंने खुद से कहा कि यह मौका बार-बार नहीं मिलेगा और अपनी टीम को गोल्ड दिलाने के लिए मैंने पूरी जान लगा दी. एक बार भी मन में नहीं आया कि बीमार होने के कारण मैच छोड़ दूं.”
महिमा का अगला लक्ष्य सीनियर टीम की प्लेइंग इलेवन में शामिल होना है. उन्होंने कहा, “मुझे बहुत मेहनत करनी होगी ताकि मैं उन खिलाड़ियों के स्तर पर पहुंच सकूं जो अभी टीम में खेल रही हैं. मेरा सपना है कि एक दिन मैं भी टीम की शुरुआत करने वाली खिलाड़ियों में शामिल हो सकूं.”
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दुबे
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